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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस ! सीएम योगी की मौन पदयात्रा

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वपूर्ण मौन पदयात्रा का आयोजन किया। इस दिन की खासियत, विभाजन की त्रासदी को याद करने और सम्मान देने के लिए आयोजित की गई थी। इस मौन पदयात्रा और प्रदर्शनी के साथ मुख्यमंत्री ने विभाजन के दौरान झेले गए दुखों को स्मरण किया और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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 विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस ! सीएम योगी की मौन पदयात्रा

Lucknow : विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वपूर्ण मौन पदयात्रा का आयोजन किया। इस दिन की खासियत, विभाजन की त्रासदी को याद करने और सम्मान देने के लिए आयोजित की गई थी। इस मौन पदयात्रा और प्रदर्शनी के साथ मुख्यमंत्री ने विभाजन के दौरान झेले गए दुखों को स्मरण किया और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मौन पदयात्रा

पदयात्रा की शुरुआत: मुख्यमंत्री ने पदयात्रा की शुरुआत सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके की। पदयात्रा का मार्ग: यह यात्रा सरदार पटेल की प्रतिमा स्थल से शुरू होकर लोकभवन तक पहुंची। मुख्यमंत्री का संदेश: यात्रा के दौरान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हाथ में तख्ती लेकर चल रहे थे, जिसमें विभाजन की त्रासदी का दंश झेलने वालों की पीड़ा को दर्शाया गया था।

विभाजन विभीषिका पर आधारित प्रदर्शनी

लोकभवन में पहुंचने के बाद, मुख्यमंत्री ने विभाजन विभीषिका पर आधारित अभिलेख प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में विभाजन की त्रासदी, उसके असर और पीड़ितों की कहानियों को चित्रित किया गया था।

उपस्थिति

उप मुख्यमंत्री: केशव प्रसाद मौर्य
स्वास्थ्य मंत्री: ब्रजेश पाठक
महापौर: सुषमा खर्कवाल
राज्यसभा सांसद: डॉ. दिनेश शर्मा
प्रदेश सरकार के मंत्री: जयवीर सिंह, बलवीर सिंह औलख
विधायक: योगेश शुक्ल, ओपी श्रीवास्तव
विधान परिषद सदस्य: महेंद्र सिंह, रामचंद्र प्रधान, मुकेश शर्मा, अनूप गुप्ता, उमेश द्विवेदी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथ में तख्ती के साथ मौन पदयात्रा में भाग लेते हुए।
विभाजन विभीषिका पर आधारित अभिलेख प्रदर्शनी का अवलोकन करते मुख्यमंत्री।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित इस मौन पदयात्रा और प्रदर्शनी ने विभाजन की त्रासदी को याद करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। यह कार्यक्रम न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि विभाजन की त्रासदी और पीड़ितों की याद को सहेजने का भी एक प्रयास है।