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8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग को लेकर सुखद संदेश जारी ! जुलाई महीने में मिल सकता है कर्मचारियों को बड़ा तोहफा

इस साल 7 मार्च को कैबिनेट ने कार भत्ता (डीए) को मूल वेतन के 4 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की मंजूरी दे दी थी. इससे सबसे ज्यादा फायदा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को होता है. नई दरें 1 जनवरी से प्रभावी होंगी, जिससे बिजली संयंत्र के कर्मचारियों का वेतन पहले से ही बढ़ जाएगा
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8th Pay Commission

8th Pay Commission: इस साल 7 मार्च को कैबिनेट ने कार भत्ता (डीए) को मूल वेतन के 4 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की मंजूरी दे दी थी. इससे सबसे ज्यादा फायदा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को होता है. नई दरें 1 जनवरी से प्रभावी होंगी, जिससे बिजली संयंत्र के कर्मचारियों का वेतन पहले से ही बढ़ जाएगा

हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में भी इजाफा

महंगाई भत्ते के साथ सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में भी इजाफा किया है। चूंकि अब डीए बेसिक सैलरी का 50 फीसदी हो गया है, कर्मचारी अब 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की डिमांड कर रहे हैं।

8वें वेतन आयोग की संभावनाएं

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू हो सकता है। हालांकि, अभी तक इसकी जानकारी सरकार द्वारा या किसी आधिकारिक अधिकारी द्वारा नहीं दी गई है। अगर 8वां वेतन आयोग लागू होता है तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 3 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है।

7वें वेतन आयोग का प्रभाव

साल 2014 में 7वें वेतन आयोग का गठन हुआ था। इसके बाद से सरकार ने कर्मचारियों के वेतन में 23 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी है। वैसे तो हर 10 साल में एक केंद्रीय वेतन आयोग का गठन होता है, लेकिन वेतन आयोग के गठन को लेकर अभी कोई कानून अनिवार्य नहीं है।

डीए और डीआर की गणना

महंगाई भत्ता का लाभ कर्मचारियों के साथ पेंशनर्स को भी मिलता है। पेंशनर्स को डीआर (Dearness Relief) मिलता है। एक साल में दो बार डीए और डीआर को बढ़ाया जाता है। डीआर और डीए की गणना अखिल भारतीय सीपीआई-आईडब्ल्यू (CPI-IW) के 12 महीने के औसत में प्रतिशत के आधार पर की जाती है। सरकार ने 2006 में डीए और डीआर कैलकुलेशन करने के फॉर्मूले को रिवाइज किया था।

पहला वेतन आयोग

सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाओं की जांच के बाद ही वेतन आयोग का गठन करती है। पहला वेतन आयोग का गठन वर्ष 1946 में हुआ था। इसके बाद से हर 10 साल में एक नए वेतन आयोग का गठन होता आया है, जो कर्मचारियों के वेतन में सुधार लाने का कार्य करता है।