Agriculture News: अरहर की खेती करेंगे वाले किसान जान लें यह राज की बात ! फिर होगी बम्पर पैदावार
Agriculture News: अरहर की खेती किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी होती है। दलहनी फसल के रूप में अरहर की खेती से न केवल आर्थिक लाभ होता है, बल्कि यह फसल मिट्टी की उर्वरता को भी बढ़ाती है। खरीफ के मौसम में किसान इसकी खेती करते हैं, जिससे उन्हें बेहतर उपज मिलती है। आइए जानें, अरहर की खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ।
मिट्टी की तैयारी और खाद का प्रबंधन
सही मिट्टी का चुनाव
अरहर की अच्छी पैदावार के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है, जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाएं:
खेत की दो से तीन बार जुताई करें।
पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें।
देशी हल से दूसरी जुताई करें।
बुवाई के समय खेत में 5 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं।
बुवाई का सही समय और बीज की मात्रा
अरहर की बुवाई का सही समय मध्य जून से मध्य जुलाई तक होता है। प्रति हेक्टेयर 20 किलोग्राम बीज की दर से बुवाई करें। बीजों को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करने से पौधों की अच्छी बढ़वार होती है।
खाद की उचित मात्रा
खेत की अंतिम जुताई के समय निम्नलिखित उर्वरकों का प्रयोग करें:
12 किलोग्राम यूरिया
100 किलोग्राम डीएपी
40 किलोग्राम पोटाश
उन्नत किस्में
अरहर की उन्नत किस्मों का चुनाव करने से उपज में वृद्धि होती है। कुछ प्रमुख किस्में निम्नलिखित हैं:
बिरसा अरहर-1
बहार
लक्ष्मी
आईसीपीएल-87119
नरेंद्र अरहर-1, नरेंद्र अरहर-2
मालवीय-13, एनटीएल-2
कीट और रोग प्रबंधन
अरहर की फसल में फली छेदक कीट और उकठा रोग का आक्रमण होता है। इनका प्रबंधन निम्नलिखित तरीके से करें:
इंडोस्कार्ब 0.5 मिली प्रति लीटर पानी के साथ मिलाकर छिड़काव करें।
फल निकलने की अवस्था में छिड़काव करें।
15 दिनों के बाद मोनो क्रोटोफॉस का छिड़काव करें।
रोगग्रस्त पौधों को खेत से उखाड़कर फेंक दें।
