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किसान भाइयों को होगा डबल फायदा, प्लास्टिक मल्चिंग विधि से सब्जियों की खेती

जिला उद्यान सहायक निदेशक निरंजन कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि उन्हें अच्छे उत्पादन के लिए नई तकनीक अपनाना जरूरी है। आधुनिक खेती में प्लास्टिक मल्चिंग विधि का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे न केवल फसलों की सुरक्षा होती है, बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ती है।
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Plastic Mulching

Plastic Mulching: जिला उद्यान सहायक निदेशक निरंजन कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि उन्हें अच्छे उत्पादन के लिए नई तकनीक अपनाना जरूरी है। आधुनिक खेती में प्लास्टिक मल्चिंग विधि का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे न केवल फसलों की सुरक्षा होती है, बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ती है।

प्लास्टिक मल्चिंग के लाभ

प्लास्टिक मल्चिंग से खेत में खरपतवार नहीं उगती, जिससे फसल को स्वस्थ वातावरण मिलता है। इस विधि में पानी की कम आवश्यकता होती है, जिससे सिंचाई का खर्च भी कम हो जाता है। फल और सब्जियां बिना दाग-धब्बों के होती हैं, जिससे उनकी बाजार में मांग और दाम दोनों बढ़ जाते हैं।

प्लास्टिक मल्चिंग विधि की प्रक्रिया

खेत की तैयारी: पहले खेतों में मेढ़ बनाई जाती है।
ड्रिप सिंचाई: पाइप बिछाकर ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था की जाती है।
प्लास्टिक मल्चिंग बेड: प्लास्टिक मल्चिंग बेड पर लगाया जाता है और गोलाकार डिब्बों में छेद करके बीज की रोपाई की जाती है।

बांका जिले में प्लास्टिक मल्चिंग का लक्ष्य

वित्तीय वर्ष 2024-25 में बांका जिले में कुल 26 हेक्टेयर प्लास्टिक मल्चिंग का लक्ष्य रखा गया है। इसमें किसानों को 50% तक का अनुदान देने का प्रावधान है।

योजना का लाभ कैसे उठाएं?

इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों का उद्यान विभाग में रजिस्ट्रेशन जरूरी है। रजिस्टर्ड किसान ही उद्यान विभाग की वेबसाइट https://horticulture.bihar.gov.in/ पर जाकर ऑनलाइन आवेदन दे सकते हैं।

जरूरी दस्तावेज

जमीन से संबंधित कागजात
आधार कार्ड

प्लास्टिक मल्चिंग विधि से खेती करने वाले किसान न केवल अपनी फसल की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं, बल्कि खरपतवार पर भी नियंत्रण पा सकते हैं। यह विधि सिंचाई की लागत को कम करके किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है। आधुनिक तकनीक को अपनाकर किसान अपनी खेती को नई ऊँचाइयों पर ले जा सकते हैं।