धान की सीधी बिजाई से इस किसान को हुआ छप्परफाड़ मुनाफा, पंजाब और हरियाणा में किसान अब अपना रहे यह तकनीक
Brief NCR, Paddy Direct Seeding Method: पंजाब और हरियाणा में धान की खेती जून महीने में शुरू होती है, जब खेतों में पानी भरकर धान की बुवाई की जाती है। परंपरागत विधि से इतर, अब किसान धान की सीधी बिजाई विधि को अपना रहे हैं, जिसमें डीएसआर (डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस) मशीन का उपयोग होता है। इस विधि के कई फायदे हैं, जिनमें भूजल की बचत, लागत में कमी और पैदावार में वृद्धि शामिल हैं।
सीधी बिजाई विधि के फायदे
पारंपरिक विधि में खेत में पानी भरकर रखना पड़ता है, जबकि सीधी बिजाई में यह आवश्यकता नहीं होती है। इससे भूजल स्तर की बचत होती है। सीधी बिजाई विधि में प्रति एकड़ 4000 रुपये का खर्च आता है, जबकि पारंपरिक विधि में यह खर्च अधिक होता है।
किसानों का कहना है कि इस विधि से प्रति एकड़ पैदावार में चार क्विंटल तक की वृद्धि होती है। इस विधि में मजदूरी का खर्च बचता है, क्योंकि सिर्फ दो मजदूर एक दिन में कई एकड़ में धान की बुवाई कर सकते हैं।
किसान दर्शन सिंह का अनुभव
संगरूर के बालिया गांव के किसान दर्शन सिंह पिछले 4 साल से डीएसआर विधि से धान की बुवाई कर रहे हैं। प्रति एकड़ में 5 क्विंटल अधिक पैदावार होती है, जिससे उन्हें 10,000 से 12,000 रुपये का मुनाफा होता है। पानी की बचत होती है और सरकारी सहायता भी मिलती है। सरकार द्वारा प्रति एकड़ 1500 रुपये की सब्सिडी दी जाती है। इस बार उन्होंने 10 एकड़ में पीआर 126, 27 और बासमती 1509 धान की बिजाई डीएसआर मशीन के साथ की है।
सरकारी प्रयास और सहयोग
संगरूर एग्रीकल्चर विभाग के चीफ डॉक्टर हरबंस सिंह चाहल ने बताया कि किसानों का रुझान इस विधि की ओर बढ़ रहा है। पानी की बचत के अलावा, प्रति एकड़ 4000 से 5000 रुपये की बचत होती है। विभाग द्वारा गांव में कैंप लगाकर किसानों को सीधी बुवाई के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
धान की सीधी बिजाई विधि पंजाब और हरियाणा में कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति लेकर आई है। इससे न केवल भूजल की बचत होती है बल्कि किसानों को अधिक मुनाफा भी होता है। सरकारी सहयोग और किसानों के सकारात्मक अनुभव इस विधि को और भी लोकप्रिय बना रहे हैं। धान की सीधी बिजाई विधि को अपनाकर, हम एक स्थायी और लाभदायक कृषि की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
