यह किसान कमा रहा साल के 20 लाख ! वो भी गोबर और केंचुए से, जानें कैसे
Brief NCR, Vermi Compost: कृषि में जैविक उर्वरकों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इस संबंध में वर्मी कम्पोस्ट, जिसे भूमि खाद भी कहा जाता है, भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। वर्मी कम्पोस्ट में सभी आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिससे फसल की पैदावार बेहतर होती है। शाहजहाँपुर के एक युवा प्रगतिशील किसान ज्ञानेश तिवारी ने अपने डेयरी फार्म से गाय के गोबर और केंचुओं की मदद से वर्मीकम्पोस्ट बनाकर अपना जीवन बदल दिया है।
ज्ञानेश तिवारी की सफलता की कहानी
ज्ञानेश तिवारी (Gyanesh Tiwari), शाहजहांपुर के नबीपुर गांव के निवासी हैं। उन्होंने साल 2010 में मेरठ से बीएड की डिग्री हासिल की और 2014 में डेयरी फार्म खोला। साल 2016 में उन्होंने वर्मी कंपोस्ट बनाने की ट्रेनिंग ली और अपने डेयरी फार्म पर वर्मी कंपोस्ट बनाना शुरू कर दिया।
वर्मी कंपोस्ट और केंचुआ उत्पादन
ज्ञानेश अब सालाना 1700 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट तैयार करते हैं और 70 क्विंटल केंचुआ बेचते हैं। वर्मी कंपोस्ट के 1 क्विंटल की कीमत 700 रुपए है। इससे उन्हें सालाना 20-21 लाख रुपए की कमाई होती है।
व्यवसाय
ज्ञानेश के पास वर्तमान में 40 पशु हैं, जिनके गोबर से वह वर्मी कंपोस्ट तैयार करते हैं। अगर गोबर कम पड़ता है, तो वह अन्य किसानों से गोबर खरीद लेते हैं। उनके यूनिट में 12 कर्मचारी काम करते हैं जो पैकेजिंग से लेकर सभी कार्यों को संभालते हैं।
मांग
शाहजहांपुर, पीलीभीत, लखनऊ समेत कई शहरों में ज्ञानेश के वर्मी कंपोस्ट की मांग है। बहुत से किसान उनके यूनिट पर आकर खाद और केंचुआ ले जाते हैं। वे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से अपने खाद की बिक्री करते हैं।
वर्मी कंपोस्ट ने जैविक खेती में एक नई क्रांति ला दी है। शाहजहांपुर के युवा किसान ज्ञानेश तिवारी ने इसे अपनाकर न केवल अपनी जिंदगी बदली है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बने हैं। वर्मी कंपोस्ट का उपयोग फसल की पैदावार बढ़ाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण है। जैविक खादों का उपयोग करने से खेती-किसानी में सुधार होगा और किसानों की आय भी बढ़ेगी।
